हमारा संस्थान
विश्वसनातनसंस्थानम्
सामाजि क समरसता ही सनातन की पहचान है।
आदिगुरु शंकराचार्य एवं स्वामी विवेकानंद से प्रेरित एक धार्मिक व सांस्कृतिक न्यास — "यतो धर्मस्ततो जयः" के आधारसूत्र पर, सनातन धर्म और सामाजिक समरसता को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाने हेतु समर्पित।

विश्व सनातन संस्थानम्
सामाजिक समरसता ही सनातन की पहचान है।

Sansthan Event
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नवरात्रि
11 अक्टू॰ 2026देवी माँ के नौ रूपों की आराधना की नौ रातें, महिषासुर पर दुर्गा की विजय का उत्सव।
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दशहरा (विजयादशमी)
20 अक्टू॰ 2026दसवाँ दिन, रावण पर श्रीराम और महिषासुर पर दुर्गा की विजय — असत्य पर धर्म की जीत।
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दीपावली
8 नव॰ 2026दीपों का पर्व, अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का उत्सव; लक्ष्मी और अनेक क्षेत्रों में श्रीराम के अयोध्या-आगमन से संबद्ध।
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महाशिवरात्रि
6 मार्च 2027शिव की महान रात्रि, रात्रि-जागरण, उपवास और ध्यान के साथ मनाई जाती है।
सनातन धर्म
जीवन को आकार देने वाले सिद्धांत
जीवन जीने की सनातन कला, नए सिरे से समझी गई — सनातन धर्म के मूल विचार, जिनमें से हर एक स्वयं और ब्रह्मांड की गहरी समझ का द्वार है।
हमारी सेवाएँ
विशेष सुविधायें
संस्थान द्वारा प्रदत्त मार्गदर्शन और साधनाएँ — तन, मन और आत्मा के कल्याण हेतु।
हमारे सदस्य
न्यास सदस्य
विश्व सनातन संस्थानम् के पदाधिकारी एवं मार्गदर्शक।

IPS कृपा शंकर सिंह
संरक्षक मण्डल

डॉ. के.एस. राणा
संरक्षक

डॉ. शंकर कुमार मिश्र
राष्ट्रीय प्रभारी

डॉ. संतोष आचार्य
संस्थापक अध्यक्ष

यशराज सिंह गोहिल
राष्ट्रीय महामंत्री

महंत अभेदानन्द गिरी
संयोजक धर्माचार्य उ.प्र.

आनन्द सिंह
जिलाप्रभारी

विमलेश सिंह
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

डॉ. हिमांशु शेखर सिंह
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष

पं. राजन मिश्र
प्रदेश संयोजक उ.प्र.

विनोद गुप्ता
प्रदेश उपाध्यक्ष उ.प्र.

एडवोकेट सुभासुर्यवंश
राष्ट्रीय अध्यक्ष मातृ प्र.

सरोजा प्रधान
राष्ट्रीय महामंत्री मातृ प्र.

डॉ. प्राची चतुर्वेदी
राष्ट्रीय संयोजक

महामण्डलेश्वर भवानी माँ
राष ्ट्रीय संयोजक किन्नर प्र.

सुमन द्विवेदी
प्रदेश प्रभारी मा. प्र.

श्रीमती दिपा सिंह
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मा. प्र.

राधिका भट्टराई
प्रदेश उपाध्यक्ष मा. प्र.

खुशबू सोनी
प्रदेश अध्यक्ष, गुजरात मा. प्र.

ममता सिंह
प्रदेश संयोजक मा. प्र.
हमारा संस्थान
संस्थान के आयोजन
विश्व सनातन संस्थानम् के कार्य — सत्संग, सेवा और उत्सव, जो जीवंत परंपरा को आगे ले जाते हैं।

21 सित॰ 2026
Sansthan Event

21 सित॰ 2026
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20 सित॰ 2026
Sansthan Event

20 सित॰ 2026
Sansthan Event

20 सित॰ 2026
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20 सित॰ 2026
Nisha Kumari Rashtriya Prabhari Sweden

18 सित॰ 2026
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17 सित॰ 2026
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16 सित॰ 2026
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15 सित॰ 2026
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15 सित॰ 2026
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15 सित॰ 2026
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14 सित॰ 2026
Sansthan Event

14 सित॰ 2026
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14 सित॰ 2026
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8 सित॰ 2026
Sansthan Event

7 सित॰ 2026
Sansthan Event

5 सित॰ 2026
Sansthan Event

15 अग॰ 2026
Manish Kumar Varanasi

22 जुल॰ 2026
Sansthan Event

22 जुल॰ 2026
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21 सित॰ 2026
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21 सित॰ 2026
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20 सित॰ 2026
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20 सित॰ 2026
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20 सित॰ 2026
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20 सित॰ 2026
Nisha Kumari Rashtriya Prabhari Sweden

18 सित॰ 2026
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17 सित॰ 2026
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16 सित॰ 2026
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15 सित॰ 2026
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15 सित॰ 2026
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14 सित॰ 2026
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14 सित॰ 2026
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14 सित॰ 2026
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8 सित॰ 2026
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7 सित॰ 2026
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15 अग॰ 2026
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22 जुल॰ 2026
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22 जुल॰ 2026
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संस्थान के बारे में
परिचय एवं उद्देश्य
हम कौन हैं, हमारा अस्तित्व क्यों है, और हमने जो कार्य करने का संकल्प लिया है।

हमारा संस्थान
विश्व सनातन संस्थानम्
सामाजिक समरसता ही सनातन की पहचान है।
विश्व सनातन संस्थानम् के कार्य — सत्संग, सेवा और उत्सव, जो जीवंत परंपरा को आगे ले जाते हैं।
॥परिचय
विश्व सनातन संस्थानम न्यास का गठन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 29 जनवरी सन् 2026 (माघ मास शुक्ल पक्ष गुप्त नवरात्रि प्रतिपदा दिन सोमवार) को भारतीय न्यास अधिनियम 1882 के अंतर्गत निष्पादित किया गया। यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक संगठन है। इस संगठन का गठन सनातन धर्म को पुनर्स्थापित करने वाले शंकराचार्य परंपरा के जनक साक्षात् शिव स्वरूप आदिगुरु शंकराचार्य को अपना आदर्श एवं सनातन धर्म की पताका विश्व में फहराने वाले और "गर्व से कहो हम हिंदू हैं" इस उक्ति को चरितार्थ करने वाले स्वामी विवेकानंद जी को मार्गदर्शक मानकर किया गया है। इस संगठन के विस्तार के लिए "विश्व सनातन संस्थानम" नाम की संगठनात्मक इकाई बनाई गई है जिसका उद्देश्य विश्व भर के "ॐ" में आस्था रखने वाले समस्त देशों में इसका सुचारु रूप से गठन करना है। इस संगठन का मुख्य आधारसूत्र "यतो धर्मस्ततो जयः" है। यह संगठन मानव समाज में व्याप्त ऊँच-नीच व छुआछूत का भेदभाव मिटाकर आपस में प्रेम, सौहार्द और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार की ओर कार्यरत है।
✦कार्ययोजना एवं उद्देश्य
(क) इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के दूतावास की स्थापना एवं सनातन धर्म बोर्ड की स्थापना करना है। (ख) भारत के विभिन्न प्रान्तों एवं क्षेत्रों में आश्रम बनाकर योग, ध्यान एवं सात्विक साधनाओं का प्रशिक्षण कराना।
आध्यात्मिक शिक्षा और साधना: भारत में सनातन धर्म व ओम (ॐ) में आस्था रखने वालों को दीक्षा देकर समाज में जागरूकता प्रदान करना तथा धर्मगुरुओं द्वारा शिष्यों को आध्यात्मिक ज्ञान देना, ध्यान साधना कराना, और वेद जैसे शास्त्रों का अध्ययन व व्याख्या कराना।
अन्य देशों के सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को भारत भ्रमण पर आने पर उनके रहने व खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध कराना।
धर्म और परंपरा का संरक्षण: किसी विशेष संप्रदाय या परंपरा के सिद्धांतों और प्रथाओं का पालन करते हुए, उन्हें संरक्षित और विकसित करना।
सामुदायिक केंद्र: भिक्षुओं और साधकों के रहने और कार्य करने का स्थान, जहाँ वे साथ रहकर आध्यात्मिक जीवन जीते हैं; साथ ही आगंतुकों के लिए एक शांत आश्रय स्थल का निर्माण कराना।
बालक/बालिकाओं के शैक्षणिक विकास के लिए नर्सरी, प्राइमरी, जूनियर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट विद्यालय, स्नातक/स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बी०एड०, बी०टी०सी०, डी०एल०एड०, एल०एल०बी०, बी०ए०एल०एल०बी० विधि महाविद्यालय की स्थापना व संचालन करना; तथा कंप्यूटर हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर, औद्योगिक, प्रौद्योगिक, तकनीकी शिक्षा, नैतिक शिक्षा व योग की जानकारी देकर स्वरोजगार हेतु तैयार करना।
साहित्य, संस्कृति, कला, विज्ञान आदि की समुन्नति के लिए प्रतिबद्ध संस्था।
सांस्कृतिक, साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करके कवियों, समाजसेवियों, चिकित्सकों, विद्वानों आदि को उनके विशिष्ट कार्यों के लिए विविध उपाधियों से सम्मानित करना।